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शाम की रोशनी में बर्फ़ से छुई शिमला की पहाड़ी छतें

शिमला यात्रा गाइड

पहाड़ों की रानी — और उसके आसपास के पहाड़ों — की यादगार यात्रा की योजना के लिए ज़रूरी सब कुछ।

शिमला हिमाचल प्रदेश की राजधानी है और 19वीं सदी के उत्तरार्ध तथा 20वीं सदी की शुरुआत के ज़्यादातर समय यह ब्रिटिश भारत की ग्रीष्मकालीन राजधानी रहा। आज यह कई पहाड़ी चोटियों पर फैली एक व्यस्त राज्य राजधानी है, जिसका औपनिवेशिक केंद्र वाहन-मुक्त है, नज़ारे बेहतरीन हैं और जंगल, बाग़ और बर्फ़ सब आसानी से पहुँच में हैं। यह गाइड बताती है कि कितने दिन रुकें, क्या देखें, कितना ख़र्च होगा और भीड़ से कैसे बचें।

संक्षिप्त इतिहास

अंग्रेज़ों के आने से पहले ये पहाड़ियाँ छोटी-छोटी पहाड़ी रियासतों का हिस्सा थीं, और इस चोटी पर देवी श्यामला के मंदिर के आसपास कुछ गाँव बिखरे थे — अक्सर कहा जाता है कि शहर का नाम इन्हीं देवी से पड़ा। 1814–16 के आंग्ल-गोरखा युद्ध के बाद अंग्रेज़ अफ़सरों ने यहाँ पहली कॉटेज बनाईं, और 1864 में सिमला को आधिकारिक रूप से ब्रिटिश भारत की ग्रीष्मकालीन राजधानी बना दिया गया। अगले आठ दशकों तक उपमहाद्वीप की सरकार हर वसंत में मैदानों से ऊपर यहाँ आ जाती थी। आज़ादी के बाद चंडीगढ़ बनने तक शिमला पंजाब की राजधानी रहा, और फिर यह हिमाचल प्रदेश की राजधानी बना।

कितने दिन चाहिए?

  • एक दिन — रिज, माल, क्राइस्ट चर्च और जाखू, या एक टॉय ट्रेन और सिटी टूर।
  • दो दिन — शहर को ठीक से देखना: वाइसरीगल लॉज, स्टेट म्यूज़ियम और एक हेरिटेज वॉक जोड़ें।
  • तीन से चार दिन — हमारा सुझाया विकल्प: कुफ़री, मशोबरा और नालदेहरा, या चैल जोड़ें।
  • पाँच दिन या ज़्यादा — नारकंडा में एक रात जोड़ें, या किन्नौर या मनाली की ओर आगे बढ़ें।
भीड़ से बचें: शिमला में सबसे ज़्यादा भीड़ गर्मियों के वीकेंड (मई–जून), स्कूल की छुट्टियों और क्रिसमस व नए साल के आसपास होती है। हफ़्ते के बीच के दिन, और मार्च–अप्रैल व अक्टूबर–नवंबर के महीने शांत होते हैं और अक्सर आसमान भी ज़्यादा साफ़ रहता है।

क्या देखें

शिमला का रिज — सजे हुए लैम्प-पोस्ट, सैलानी और पीछे पहाड़ी ढलान पर बसा शहर शिमला शहर

रिज और माल रोड

पहाड़ों की रानी का खुला आँगन

शहर की चोटी पर फैला चौड़ा, वाहन-मुक्त सैरगाह और उसके नीचे घूमती ख़रीदारी की सड़क। स्कैंडल पॉइंट, टाउन हॉल, गेयटी थिएटर, लक्कड़ बाज़ार और शिमला के सबसे अच्छे पहाड़ी नज़ारे — सब कुछ ही मिनट की पैदल दूरी पर।

गहरे नीले आसमान के सामने शिमला के क्राइस्ट चर्च की नव-गॉथिक मीनार शिमला शहर

क्राइस्ट चर्च

रिज पर हल्के पीले रंग की पहचान

1857 में पूरा हुआ यह नव-गॉथिक चर्च उत्तर भारत के सबसे पुराने चर्चों में से एक है, और शिमला की वह तस्वीर जो हर कोई साथ ले जाता है। भीतर सुंदर रंगीन काँच की खिड़कियाँ और अंग्रेज़ी राज के दौर की पीतल की स्मृति-पट्टिकाएँ हैं।

पेड़ों के ऊपर उठती जाखू मंदिर की विशाल हनुमान प्रतिमा शिमला शहर

जाखू मंदिर

हनुमान जी की पहाड़ी, शहर का सबसे ऊँचा बिंदु

लगभग 2,450 मीटर ऊँची जाखू पहाड़ी की चोटी पर हनुमान जी का प्राचीन मंदिर, जिस पर 2010 से हनुमान जी की विशाल नारंगी प्रतिमा है जो पूरे शिमला से दिखती है। देवदारों के बीच से पैदल चढ़ें या रोपवे लें — और बंदरों से सावधान रहें।

शिमला का वाइसरीगल लॉज — मीनारों और चौड़े लॉन वाली स्लेटी पत्थर की हवेली शिमला शहर

वाइसरीगल लॉज

जहाँ से अंग्रेज़ हर गर्मी भारत चलाते थे

1888 में भारत के वायसरायों के लिए बनी स्लेटी पत्थर की जैकोबीथन शैली की हवेली, 1945 के शिमला सम्मेलन की गवाह और आज भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान। गाइडेड टूर में सागौन की लकड़ी से सजे हॉल दिखाए जाते हैं, और लॉन से पहाड़ों का नज़ारा मिलता है।

रास्तों और टूर की जानकारी सहित सभी सोलह जगहें हमारी दर्शनीय स्थलों की गाइड में देखें।

नमूना यात्रा-कार्यक्रम

  • दिन 1 — रिज और माल: पहुँचें, चेक-इन करें, फिर सूर्यास्त के समय गाइड के साथ हेरिटेज वॉक: स्कैंडल पॉइंट, क्राइस्ट चर्च, गेयटी और लक्कड़ बाज़ार।
  • दिन 2 — जाखू और वाइसरीगल लॉज: सुबह जल्दी पैदल या रोपवे से जाखू जाएँ, फिर दोपहर बाद पश्चिम की ओर स्टेट म्यूज़ियम और वाइसरीगल लॉज।
  • दिन 3 — पहाड़ियों की ओर: बर्फ़ और नज़ारों के लिए कुफ़री और फागू, या जंगल और बाग़ों के लिए मशोबरा और नालदेहरा; सर्दियों में तत्तापानी।
  • दिन 4 — चैल या टॉय ट्रेन: चैल में एक दिन, या टॉय ट्रेन से बड़ोग तक जाकर वापस आएँ।

कितना ख़र्च होता है

शिमला मैदानी इलाक़ों से महँगा है, ख़ास तौर पर पीक सीज़न में, लेकिन फिर भी पैसे की अच्छी वसूली है। आम ख़र्च:

चीज़आम कीमत
क्राइस्ट चर्च, जाखू मंदिरमुफ़्त (दान का स्वागत है)
वाइसरीगल लॉज का गाइडेड टूरमामूली टिकट; विदेशी सैलानियों के लिए ज़्यादा — गेट पर पता करें
सार्वजनिक लिफ़्ट, कार्ट रोड से मालहर सवारी का मामूली शुल्क
टॉय ट्रेन, कालका–शिमलाट्रेन और श्रेणी के अनुसार कम से मध्यम
स्थानीय रेस्तराँ में हिमाचली थाली या धामसस्ता — कुछ सौ रुपये
कुफ़री या चैल की डे ट्रिप के लिए टैक्सीटैक्सी स्टैंड पर किराया तय करें; दरें अक्सर यूनियन तय करती है
गाइड के साथ हेरिटेज वॉकGetYourGuide पर लगभग US$14 से

होटलों की कीमतें मौसम के साथ बहुत बदलती हैं: गर्मियों के वीकेंड और क्रिसमस–नए साल का हफ़्ता, मानसून में हफ़्ते के बीच की किसी रात से कहीं ज़्यादा महँगे होते हैं।

क्या खाएँ

माल के ज़्यादातर रेस्तराँ उत्तर भारतीय, पंजाबी और चाइनीज़ स्टाइल के व्यंजन परोसते हैं, लेकिन हिमाचली खाना ज़रूर ढूँढें: सिड्डू (खसखस या अखरोट के पेस्ट से भरे भाप में पके गेहूँ के बन, घी के साथ), छा गोश्त (दही की ग्रेवी में मटन), मदरा (दही में पके छोले या राजमा) और धाम — चावल, दाल और सब्ज़ियों का उत्सवी भोज, जो पत्तल पर परोसा जाता है। माल पर श्रमिकों की सहकारी संस्था द्वारा चलाया जाने वाला इंडियन कॉफ़ी हाउस कॉफ़ी और दक्षिण भारतीय नाश्ते के लिए शिमला की एक पहचान है।

स्थानीय खाना चखने का सबसे आसान तरीक़ा है घर के खाने का अनुभव या स्ट्रीट-फ़ूड की सैर।

कहाँ ठहरें

  • माल के पास — हेरिटेज होटल और मध्यम बजट के ठिकाने, जहाँ से हर जगह पैदल पहुँचा जा सके; पीक सीज़न में शोर, लेकिन माहौल बेजोड़।
  • शहर से बाहर — मशोबरा, कुफ़री, नालदेहरा और ठियोग में जंगलों के बीच रिसॉर्ट, नज़ारे और सुकून के साथ, लेकिन गाड़ी ज़रूरी होगी।

दोनों के सबसे अच्छे विकल्पों की तुलना हमारे कहाँ ठहरें पेज पर है।

ज़रूरी व्यावहारिक जानकारी

  • पैसे: भारतीय रुपया (₹)। UPI मोबाइल भुगतान हर जगह चलता है; होटलों और बड़ी दुकानों में कार्ड चलते हैं। ATM ज़्यादातर माल और कार्ट रोड पर हैं।
  • भाषा: हिंदी और स्थानीय पहाड़ी बोलियाँ; होटलों और दुकानों में अंग्रेज़ी ख़ूब बोली जाती है, और पंजाबी आम तौर पर समझी जाती है।
  • सुरक्षा: शिमला आम तौर पर सुरक्षित और सुकून भरा है। मुख्य ख़तरे हैं संकरी सड़कों का ट्रैफ़िक, बारिश या बर्फ़ में फिसलन भरी सीढ़ियाँ, और बंदर।
  • बंदर: रीसस मकाक और लंगूर पूरे शहर में, ख़ास तौर पर जाखू पर रहते हैं। खाना छिपाकर रखें, चश्मा और फ़ोन सँभालकर रखें, और उन्हें कभी खाना न दें।
  • मानसून: जुलाई से सितंबर तक भूस्खलन से सड़कें और रेलवे बंद हो सकते हैं। अतिरिक्त समय रखें और स्थानीय सलाह मानें।
  • क्या पैक करें: हर मौसम में परतदार कपड़े (जून में भी शामें ठंडी होती हैं), सर्दियों में गर्म जैकेट, दस्ताने और टोपी, अच्छी पकड़ वाले आरामदायक जूते, मानसून में रेनवियर और ऊँचाई की धूप के लिए सनस्क्रीन।
  • नियम: हिमाचल प्रदेश में पॉलीथीन की थैलियों पर प्रतिबंध है; सार्वजनिक जगहों पर धूम्रपान और गंदगी फैलाने पर जुर्माना लगता है।

आम ग़लतियाँ

  • जून में शुक्रवार की शाम बिना होटल बुकिंग के पहुँच जाना।
  • माल तक गाड़ी ले जाने की सोचना — ऐसा हो नहीं सकता; पहले से तय करें कि गाड़ी कहाँ खड़ी करेंगे।
  • क्रिसमस पर पक्की बर्फ़ की उम्मीद करना। शहर में बर्फ़ आम तौर पर बाद में आती है, अगर आती है तो।
  • जाखू जाते समय खाने-पीने की चीज़ें खुलेआम हाथ में लेकर चलना।
  • सिर्फ़ माल देखकर लौट जाना। जंगल, वाइसरीगल लॉज और शहर के आसपास के गाँव ही असली शिमला हैं।
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औपनिवेशिक गलियाँ, यूनेस्को रेलवे और हिमालय के नज़ारे — एक ही यात्रा में

किस्सागो गाइड के साथ रिज पर घूमें, सुरंगों से गुज़रती टॉय ट्रेन में सफ़र करें, जाखू तक चढ़ें और कुफ़री, मशोबरा या तत्तापानी निकल जाएँ। गाइडेड टूर और डे-ट्रिप की तुलना करें और कुछ ही क्लिक में बुक करें।

जानने लायक बातें

शिमला यात्रा: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

शिमला को पहाड़ों की रानी क्यों कहा जाता है?

इसकी सुंदरता, हिमालय के नज़ारों वाली चोटी पर इसकी स्थिति, और अंग्रेज़ों के सबसे भव्य हिल स्टेशन तथा ब्रिटिश भारत की ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप में इसकी भूमिका के कारण।

क्या शिमला पर्यटकों के लिए सुरक्षित है?

हाँ। यह आम तौर पर सुरक्षित और मेहमाननवाज़ है। फिसलन भरे रास्तों, संकरी सड़कों के ट्रैफ़िक और बंदरों से सावधान रहें, और मानसून में तथा बर्फ़बारी के बाद सड़कों की स्थिति जाँच लें।

शिमला की ऊँचाई कितनी है?

रिज लगभग 2,200 मीटर पर है, और सबसे ऊँचा बिंदु जाखू लगभग 2,450 मीटर पर। इस ऊँचाई पर आम तौर पर ऊँचाई से होने वाली बीमारी की समस्या नहीं होती।

शिमला किस खाने के लिए मशहूर है?

सिड्डू, छा गोश्त, मदरा और उत्सवी धाम जैसे हिमाचली व्यंजन — साथ ही माल का इंडियन कॉफ़ी हाउस और ढेर सारे स्ट्रीट स्नैक्स।

क्या शिमला में गाइड की ज़रूरत है?

घूमने-फिरने के लिए नहीं, लेकिन एक अच्छे क़िस्सागो के साथ शहर का इतिहास जीवंत हो उठता है। दो घंटे की हेरिटेज वॉक सस्ती है और पूरी तरह सार्थक।