शिमला हिमालय की तलहटी में लगभग 2,200 मीटर की ऊँचाई पर बसा है — चंडीगढ़ से सड़क मार्ग से करीब 115 km और दिल्ली से 340–360 km। ज़्यादातर लोग कालका, परवाणू और सोलन होकर जाने वाले फ़ोर-लेन हाईवे से सड़क के रास्ते आते हैं; रोमांटिक विकल्प है कालका–शिमला टॉय ट्रेन। जुब्बड़हट्टी में शिमला के अपने हवाई अड्डे पर गिनी-चुनी उड़ानें ही आती हैं।
पहुँचने के मुख्य रास्ते: एक तुलना
| कैसे | आम तौर पर सफ़र | ख़र्च | किसके लिए बेहतर |
|---|---|---|---|
| चंडीगढ़ से टैक्सी या कार | लगभग 3–4 घंटे (≈115 km) | मध्यम | ज़्यादातर यात्री |
| दिल्ली से कार या Volvo बस | लगभग 7–9 घंटे (≈350 km) | कम (बस) से मध्यम (कार) | सीधा, रात भर का विकल्प |
| कालका तक ट्रेन + टॉय ट्रेन | लगभग 4 घंटे + 5–6 घंटे | कम से मध्यम | सुंदर नज़ारों वाला क्लासिक रास्ता |
| कालका तक ट्रेन + टैक्सी | लगभग 4 घंटे + 2.5–3 घंटे | मध्यम | रेल का आराम, जल्दी पहुँचना |
| शिमला (जुब्बड़हट्टी) की उड़ान | दिल्ली से लगभग 1–1.5 घंटे | बदलता रहता है; सीटें कम | कम समय वाले यात्री |
| चंडीगढ़ की उड़ान + सड़क | लगभग 1 घंटे की उड़ान + 3–4 घंटे सड़क | बदलता रहता है | भरोसेमंद हवाई पहुँच |
सड़क मार्ग से
चंडीगढ़ से हाईवे (NH5) पिंजौर, कालका और परवाणू से होकर धर्मपुर और सोलन के रास्ते चढ़ते हुए शिमला पहुँचता है। इसका बड़ा हिस्सा फ़ोर-लेन कर दिया गया है, और ट्रैफ़िक के हिसाब से सफ़र में करीब तीन से चार घंटे लगते हैं। दिल्ली से हरियाणा होकर NH44 से चंडीगढ़ या ज़ीरकपुर तक का सफ़र जोड़ लें — कुल मिलाकर लगभग सात से नौ घंटे।
हिमाचल रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (HRTC) और निजी ऑपरेटर अक्सर बसें चलाते हैं, जिनमें दिल्ली के कश्मीरी गेट ISBT से रात भर चलने वाली एयर-कंडीशंड Volvo बसें भी हैं। ये शिमला के केंद्र से कुछ किलोमीटर नीचे टूटीकंडी स्थित ISBT पर पहुँचती हैं; वहाँ से लोकल बसें और टैक्सियाँ कार्ट रोड के पुराने बस स्टैंड तक जाती हैं।
ट्रेन और टॉय ट्रेन से
ब्रॉड-गेज लाइन पहाड़ियों की तलहटी में कालका पर ख़त्म होती है। कालका शताब्दी और नई दिल्ली से आने वाली दूसरी ट्रेनें करीब चार घंटे में कालका पहुँचती हैं; सुबह की शताब्दी का तालमेल नैरो-गेज हिमालयन क्वीन और अन्य टॉय ट्रेनों से है। 96 km लंबी कालका–शिमला रेलवे का सफ़र लगभग पाँच से छह घंटे का है। शिमला स्टेशन शहर के पश्चिमी छोर पर, रिज से करीब 1.5 km दूर है।
गर्मियों और छुट्टियों के लिए भारतीय रेलवे (IRCTC) से ट्रेन टिकट काफ़ी पहले बुक करें। मानसून की भारी बारिश में भूस्खलन के कारण टॉय ट्रेन सेवाएँ बाधित हो सकती हैं।
हवाई मार्ग से
शहर से लगभग 22 km दूर जुब्बड़हट्टी स्थित शिमला हवाई अड्डे का रनवे छोटा है और यहाँ छोटे विमानों की गिनी-चुनी उड़ानें ही आती हैं, मुख्य रूप से दिल्ली और उत्तर भारत के कुछ अन्य शहरों से। समय-सारणी अक्सर बदलती है और ख़राब मौसम में उड़ानें अक्सर रद्द हो जाती हैं — इन्हें योजना नहीं, बोनस समझें। रोज़ाना कई उड़ानों वाला चंडीगढ़ अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भरोसेमंद हवाई प्रवेश-द्वार है, जो शिमला से सड़क मार्ग से तीन से चार घंटे की दूरी पर है।
शिमला में आना-जाना
- पैदल: रिज और माल का ज़्यादातर हिस्सा वाहन-मुक्त है। आरामदायक जूते पहनें — पूरा शहर ढलानों और सीढ़ियों से भरा है।
- सार्वजनिक लिफ़्ट: मामूली शुल्क पर कार्ट रोड को माल से जोड़ती है; पीक सीज़न में लंबी कतारें लगती हैं।
- टैक्सी: कार्ट रोड और बाहरी सड़कों पर चलती हैं, माल पर नहीं। डे ट्रिप के लिए पूरे दिन के लिए ड्राइवर सहित गाड़ी किराए पर लें, या कोई टूर बुक करें।
- लोकल बसें: HRTC की बसें कार्ट रोड को ISBT, संजौली, मशोबरा, कुफ़री और आगे की जगहों से जोड़ती हैं।
- कुली: लाइसेंसधारी कुली माल के पास के होटलों तक सामान पहुँचाते हैं — पहले शुल्क तय कर लें।
- ख़ुद गाड़ी चलाना: संभव है पर तनाव भरा — संकरी सड़कें, पार्किंग की कमी और केंद्र में वाहनों पर पाबंदियाँ। हिमाचल से बाहर के वाहनों को राज्य की सीमा पर प्रवेश शुल्क देना होता है।
शिमला से आगे
- कुफ़री, मशोबरा, चैल: गाड़ी से 30 मिनट से 2 घंटे; हमारी दर्शनीय स्थलों की गाइड देखें।
- नारकंडा (≈65 km): NH5 पर पूर्व की ओर 2.5–3 घंटे।
- मनाली (≈250 km): बिलासपुर, मंडी और कुल्लू होते हुए 8–10 घंटे, या निजी ट्रांसफ़र।
- किन्नौर और स्पीति: सतलुज के साथ-साथ पूर्व की ओर कई दिनों की सड़क यात्रा।
- धर्मशाला (≈230–240 km): बिलासपुर और हमीरपुर होते हुए लगभग 7–8 घंटे।

