शिमला की जलवायु हल्की पहाड़ी है और यहाँ चार साफ़ मौसम होते हैं: सुहाना वसंत और गर्मी (मार्च–जून), बरसाती मानसून (जुलाई–सितंबर), साफ़ और ताज़ा पतझड़ (अक्टूबर–नवंबर) और कभी-कभार बर्फ़ के साथ ठंडी सर्दी (दिसंबर–फ़रवरी)। यहाँ जाने का कोई बुरा समय नहीं है, लेकिन हर मौसम अलग तरह की यात्रा के लिए उपयुक्त है।
शिमला: महीने-दर-महीने
| महीना | आम तौर पर दिन / रात | बारिश / बर्फ़ | निष्कर्ष |
|---|---|---|---|
| जनवरी | 9 / 2 °C | बर्फ़ की संभावना | ठंड; बर्फ़ की सबसे ज़्यादा संभावना; नए साल के आसपास विंटर कार्निवल |
| फ़रवरी | 11 / 3 °C | बर्फ़ की संभावना | ठंड; बर्फ़ संभव, ख़ास तौर पर महीने की शुरुआत में |
| मार्च | 15 / 6 °C | थोड़ी | अच्छा; बुरांस के फूल और कम भीड़ |
| अप्रैल | 19 / 10 °C | कम | बेहतरीन; वसंत के फूल |
| मई | 23 / 14 °C | कम | पीक सीज़न — सुहाना लेकिन भीड़ भरा |
| जून | 24 / 16 °C | मानसून से पहले की बौछारें | बारिश आने तक भीड़; समर फ़ेस्टिवल |
| जुलाई | 21 / 15 °C | भारी | मानसून; भूस्खलन का ख़तरा |
| अगस्त | 20 / 15 °C | भारी | सबसे ज़्यादा बारिश वाला महीना; धुंध भरे जंगल |
| सितंबर | 20 / 13 °C | मध्यम | बारिश कम होती हुई; हरियाली और शांति |
| अक्टूबर | 18 / 10 °C | कम | बेहतरीन; सबसे साफ़ नज़ारे; दशहरा |
| नवंबर | 15 / 6 °C | बहुत कम | ठंडा और साफ़; शांत |
| दिसंबर | 11 / 3 °C | महीने के आख़िर में बर्फ़ संभव | ठंड; क्रिसमस के आसपास त्योहारी भीड़ |
ये तापमान शहर के सामान्य औसत हैं और साल-दर-साल बदलते हैं; कुफ़री और नारकंडा कई डिग्री ज़्यादा ठंडे होते हैं।
वसंत और गर्मी: मार्च से जून
दिन धूप भरे और सुहाने होते हैं, मार्च और अप्रैल में बुरांस के लाल फूल खिलते हैं, और जब मैदान तप रहे होते हैं तब यहाँ हवा ताज़ा रहती है। यह शिमला का पीक सीज़न है, और मई के मध्य से जून के आख़िर तक सबसे ज़्यादा भीड़ रहती है, जब दिल्ली, पंजाब और दूसरी जगहों से परिवार गर्मी से बचने आते हैं। होटल जल्दी बुक करें, हो सके तो वीकेंड से बचें, और ऊपर आने वाली सड़कों पर ट्रैफ़िक की उम्मीद रखें। समर फ़ेस्टिवल आम तौर पर मई के आख़िर या जून में रिज पर होता है।
मानसून: जुलाई से सितंबर
मानसून भारी बारिश लाता है, ख़ास तौर पर जुलाई और अगस्त में। जंगल हरे-भरे और धुंध में लिपटे होते हैं, होटल सस्ते हो जाते हैं और भीड़ छँट जाती है, लेकिन भूस्खलन से सड़कें बंद हो सकती हैं और टॉय ट्रेन रुक सकती है, और ऊँची चोटियों के नज़ारे कम ही दिखते हैं। अगर इस दौरान यात्रा करें, तो अतिरिक्त दिन रखें, मौसम की चेतावनियों पर ध्यान दें और भारी बारिश के बाद लंबी पहाड़ी ड्राइव से बचें।
पतझड़: अक्टूबर और नवंबर — पारखियों की पसंद
बारिश के बाद हवा धुलकर साफ़ हो जाती है और बर्फ़ीली पर्वत-शृंखलाएँ सबसे साफ़ दिखती हैं। दिन धूप भरे और ठंडे होते हैं, रातें सर्द, और दशहरा व दिवाली के आसपास को छोड़कर भीड़ काफ़ी कम रहती है। पैदल घूमने, नज़ारों और फ़ोटोग्राफ़ी के लिए यह सबसे अच्छा समय है।
सर्दी: दिसंबर से फ़रवरी — और बर्फ़ का सवाल
सर्दियाँ ठंडी होती हैं और रातें जमा देने वाली ठंड के क़रीब। शिमला शहर में बर्फ़, अगर गिरती है, तो आम तौर पर दिसंबर के आख़िर से फ़रवरी के बीच — सफ़ेद क्रिसमस संभव है पर आम नहीं। ज़्यादा ऊँचाई वाले कुफ़री, फागू और नारकंडा में बर्फ़ ज़्यादा भरोसे से गिरती है, और अच्छे सालों में नारकंडा की ढलानों पर शुरुआती स्कीइंग होती है। भारी बर्फ़ शिमला से आगे की सड़कों को एक दिन या उससे ज़्यादा के लिए बंद कर सकती है। क्रिसमस और नए साल पर भारी भीड़ होती है और रिज पर विंटर कार्निवल लगता है; जनवरी और फ़रवरी शांत रहते हैं।
कब सावधान रहें
- मई–जून और नए साल के व्यस्त वीकेंड। होटल भरे होते हैं और ट्रैफ़िक जाम घंटों लंबे।
- मानसून की भारी बारिश। भूस्खलन और सड़कें बंद — स्थानीय सलाह मानें।
- भारी बर्फ़बारी के बाद। बर्फ़ीली सड़कें और रास्ते; देख लें कि कुफ़री और नारकंडा की सड़कें खुली हैं या नहीं।
त्योहारों का कैलेंडर एक नज़र में
- दिसंबर के आख़िर–जनवरी की शुरुआत: क्राइस्ट चर्च में क्रिसमस और रिज पर विंटर कार्निवल।
- जनवरी के मध्य: तत्तापानी में मकर संक्रांति मेला।
- मई–जून: रिज पर समर फ़ेस्टिवल।
- सितंबर–अक्टूबर: तारा देवी और अन्य मंदिरों में नवरात्रि; दशहरा।
- अक्टूबर–नवंबर: दिवाली; किन्नौर के रास्ते पर रामपुर में लवी व्यापार मेला (नवंबर)।
त्योहारों की तारीख़ें हर साल बदलती हैं — योजना बनाने से पहले पता कर लें।

